1. जीवन परिचय
- जन्म: मुंशी प्रेमचंद का असली नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, और उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को उत्तर प्रदेश के लमही गाँव में हुआ था।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता, अजायब राय, डाक विभाग में कार्यरत थे, और उनकी माता, आनंदी देवी, एक धार्मिक महिला थीं। उनकी माता का निधन प्रेमचंद के बचपन में हो गया, जिसके कारण उनका जीवन कठिनाईयों से भरा रहा।
- शिक्षा: प्रेमचंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वाराणसी में प्राप्त की और बाद में शिक्षक की नौकरी की। सरकारी नौकरी करते हुए भी उन्होंने साहित्य सृजन जारी रखा।
- निधन: 8 अक्टूबर 1936 को वाराणसी में प्रेमचंद का निधन हो गया।
2. साहित्यिक योगदान
प्रेमचंद हिंदी और उर्दू साहित्य के महानतम लेखकों में से एक हैं। उनका लेखन समाज के विभिन्न पहलुओं पर आधारित था, जिसमें ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमताएँ, और आर्थिक शोषण को उन्होंने प्रमुखता दी। उनका साहित्य समाज के निम्न वर्ग के जीवन की कठिनाइयों को प्रकट करता है।
3. प्रमुख रचनाएँ
(i) उपन्यास
प्रेमचंद के उपन्यास उनकी सामाजिक और राजनीतिक चेतना का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने 12 से अधिक उपन्यास लिखे, जिनमें से प्रमुख हैं:
- गोदान: यह उनका अंतिम और सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें भारतीय ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और शोषण का यथार्थ चित्रण किया गया है। पात्र 'होरी' के माध्यम से प्रेमचंद ने किसानों के संघर्ष और उनके सपनों की टूटन को दिखाया है।
- गबन: यह उपन्यास मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन और नैतिक पतन को दर्शाता है। इसकी कहानी जेवर गबन और उससे उत्पन्न समस्याओं पर आधारित है।
- निर्मला: इस उपन्यास में बाल विवाह और दहेज प्रथा की समस्याओं का चित्रण है, जो भारतीय समाज की स्त्रियों की पीड़ा को व्यक्त करता है।
- सेवासदन: इसमें सामाजिक मुद्दों, विशेषकर वेश्यावृत्ति और नारी शिक्षा, को प्रेमचंद ने प्रमुखता दी है।
(ii) कहानियां
प्रेमचंद ने लगभग 300 कहानियाँ लिखी, जिनमें समाज के हर वर्ग की समस्याओं को उभारा गया है। उनकी कहानियाँ सरल, यथार्थवादी, और सामाजिक रूप से जागरूक थीं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियाँ निम्नलिखित हैं:
- पूस की रात: इस कहानी में किसान 'हल्कू' की ठंड से लड़ाई और उसकी बेबसी का मार्मिक चित्रण किया गया है।
- कफन: यह प्रेमचंद की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में से एक है, जो गरीबी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण मानवीय संवेदनाओं के पतन को दर्शाती है।
- ईदगाह: यह एक बाल कथा है, जिसमें एक छोटे लड़के हामिद की दादी के लिए प्यार और त्याग की कहानी को दर्शाया गया है।
4. साहित्य की विशेषताएँ
प्रेमचंद की लेखनी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यथार्थवाद: प्रेमचंद का साहित्य समाज के यथार्थ को प्रकट करता है। उन्होंने समाज में फैली हुई कुरीतियों, विषमताओं, और आर्थिक शोषण को अपने लेखन में प्रमुखता दी है।
- सामाजिक जागरूकता: प्रेमचंद का साहित्य समाज सुधार और नैतिकता पर आधारित है। उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज में व्याप्त समस्याओं को उठाया और समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
- मानवता का पक्षधर: प्रेमचंद का लेखन मानवीय संवेदनाओं और पीड़ा को उभारता है। उनके पात्र जीवन की कठिनाइयों से जूझते हैं और समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं।
- साधारण भाषा और शैली: प्रेमचंद की भाषा सरल, सजीव और आम जनता की समझ में आने वाली थी। उनकी लेखन शैली ने हिंदी साहित्य को व्यापक रूप से स्वीकार्य बनाया।
5. उपसंहार
प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का 'कलम का सिपाही' कहा जाता है। उनके साहित्य ने समाज में नई जागरूकता और संवेदना पैदा की। उनकी रचनाएँ समाज के हर वर्ग के लोगों को प्रभावित करती हैं और हिंदी साहित्य में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
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